वायु मंण्डल की संरचना एवं परतें, Vayumandal ki sanrachna and layers

Hello Students, आज कि इस लेख के माध्य से हम आपको वायु मंण्डल से सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी देंगे कि वायु मंण्डल किसे कहतें है, हमारे वायु मंण्डल में कितनी परते है। आदि से सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी के लिए हमारी लेख को जरूर पढें।

vayumandal ki puri jankari

वायु मंण्डल किसे कहते है?(What is the Atmosphere?) 

पृथ्वी के चारों ओर सैकड़ो किमी की मोटाई में लपेटने वाले गैसीय आवरण को वायुमण्डल कहते हैं। वायुमण्डल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो पृथ्वी को चारो ओर से घेरे हुए है। निचले स्तरों में वायुमण्डल का संघटन अपेक्षाकृत एक समान रहता है। ऊँचाई में गैसों की आपेक्षिक मात्रा में परिवर्तन पाया जाता है।शुद्ध और शुष्क वायु में नाइट्रोजन 78 प्रतिशत, ऑक्सीजन, 21 प्रतिशत, आर्गन 0.93 प्रतिशत कार्बन डाई ऑक्साइड 0.03 प्रतिशत तथा हाइड्रोजन, हीलियम, ओज़ोन, निऑन, जेनान, आदि अल्प मात्रा में उपस्थित रहती हैं। जल वाष्प के कारण ही बादल, कोहरा, पाला, वर्षा, ओस, हिम, ओला, हिमपात होता है। वायुमण्डल में ओजोन परत की पृथ्वी और उस पर रहने वाले जीवों के लिए बड़ी ही महत्त्वपूर्ण भूमिका है। यह परत सूर्य से आने वाली उच्च आवृत्ति की पराबैंगनी प्रकाश की 93-99% मात्रा अवशोषित कर लेती है, जो पृथ्वी पर जीवन के लिये हानिकारक है। ओजोन की परत की खोज 1913 में फ़्राँस के भौतिकविद फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने की थी।

वायुमण्डल की परतें (Plane’s layers)

 वायु मंण्डल को 5 विभिन्न परतों में विभाजित किया गया है-

  1. क्षोभमण्डल
  2. समतापमण्डल
  3. मध्यमण्डल
  4. तापमण्डल
  5. बाह्यमण्डल

क्षोभ मंण्ड़ल (Troposphere) 

  1. यह वायुमंडल की सबसे निचली सक्रिय तथा सघन परत है।
  2. इसमें वायुमंडल के कुल आणविक भार का 75 % केंद्रित है।
  3. इस परत में आद्रता जलकण धूलकण वायु धुन्ध तथा सभी प्रकार की वायुमंडलीय विक्षोभ व गतियां संपन्न होती है।
  4. धरातल से इस परत की ऊंचाई १४ KM है |यह परत ध्रुवों से भूमध्य रेखा की और जाती हुई पतली होती जाती है। भूमध्य रेखा पर इसकी ऊंचाई 18 km तथा ध्रुवों पर 8-10 km है।
  5. ऊंचाई बढ़ने के साथ इसके तापमान में कमी आती है। तापक्षय दर 6.5 °C / km है। तापक्षय की दर ऋतु परिवर्तन वायुदाब तथा स्थानीय धरातल की प्रकृति से भी प्रभावित होती है।
  6. समस्त मौसमी परिवर्तन इसी परत में होता है। यह परत सभी प्रकार के मेघों और तुफानो की बहरी सीमा बनाती है।
  7. वायु यहाँ पूर्णतः अशांत रहती है। इसमें निरंतर विक्षोभ बनते रहते है और संवाहन धाराएं चलती रहती है। यह भाग विकिरण , सञ्चालन ,संवाहन द्वारा गरम और ठंडा होता रहता है। संवाहन धाराएं अधिक चलने से इसे संवहनीय प्रदेश आ उदवेलित संवाहन स्तर (turbulent convective strata ) भी कहते है।

समताप मंण्ड़ल (Stratosphere)

  1. इसका विस्तार 8 या 18 किमी से 50 किमी तक होता है !
  2. इसमें ओजोन परत (15 से 35 किमी) पाऐ जानें के कारण इसे ओजोन मंडल भी कहते हैं
  3. ओज़ोन गैस सौर्यिक विकिरण की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सोख लेती है और
  4. उन्हें भूतल तक नहीं पहुंचने देती है तथा पृथ्वी को अधिक गर्म होने से बचाती हैं।
  5. इस मण्डल में प्रारंभ में तापमान स्थिर रहता है तथा 20 किमी के बाद बढनें लगता है।
  6. ऐसा ओजोन गैसों की उपस्थिति के कारण होता है,जोकि पराबैगनी किरणों को अबशोषित कर तापमान बढा देती हैं।
  7. समताप मण्डल बादल तथा मौसम संबंधी घटनाओं से मुक्त रहता है।
  8. इस मण्डल के निचले भाग में जेट वायुयान के उड़ान भरने के लिए आदर्श दशाएं हैं।

मध्य मंडल (Middle division)

  1. 50 से 80 km तक की ऊंचाई वाला वायुमंडल को मध्य मंडल कहते हैं।
  2. यहाँ ऊंचाई के साथ तापमान में कमी आती हैं।
  3. 80 km की ऊंचाई पर तापमान -100 °C हो जाता हैं। इस न्यूनतम तापमान को मेसोपस कहते हैं।

तापमंण्डल (Thermal circle)

  1. इस मण्डल में ऊंचाई के साथ ताप में तेजी से वृद्धि होती है।
  2. तापमण्डल को पुनः दो उपमण्डलों ‘आयन मण्डल’ तथा ‘आयतन मण्डल’ में विभाजित किया गया है।
  3. आयन मण्डल, तापमण्डल का निचला भाग है जिसमें विद्युत आवेशित कण होते हैं जिन्हें आयन कहते हैं।
  4. ये कण रेडियो तरंगों को भूपृष्ठ पर परावर्तित करते हैं और बेतार संचार को संभव बनाते हैं।
  5. तापमण्डल के ऊपरी भाग आयतन मण्डल की कोई सुस्पष्ट ऊपरी सीमा नहीं है। इसके बाद अन्तरिक्ष का विस्तार है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण परत है।

बाह्य मंडल (Outer circle)

  1. यह वायुमंडल की सबसे बाहरी परत हैं।
  2. इसकी ऊंचाई 640 -1000 km तक होती हैं।
  3. यहाँ हाइड्रोजन तथा हीलियम गैसों की प्रधानता होती हैं।

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